Sunday, 28 December 2025

प्राण ऊर्जा प्राप्त क्यों नहीं हो रही है या क्यों शीघ्र नष्ट हो जाती है?

ऐसा क्यों होता है कि कुछ लोगों को प्राण-शक्ति प्रदान किए जाने के बावजूद भी वे उसे स्वीकार नहीं कर पाते?
और जो स्वीकार कर लेते हैं, उनमें भी कुछ समय बाद वह ऊर्जा क्यों क्षीण हो जाती है?

जीवन-शक्ति को नष्ट करने वाली ऊर्जा: कारण, मनोविज्ञान और व्यावहारिक समाधान

प्राणिक चिकित्सा, प्राण ऊर्जा और ऊर्जा-चिकित्सा के क्षेत्र में यह एक गंभीर और ईमानदार प्रश्न है, जो लंबे समय से साधकों और चिकित्सकों द्वारा पूछा जाता रहा है—

यह विषय केवल आस्था या विश्वास तक सीमित नहीं है।
यह मन, भावनाओं, ऊर्जा-शरीर (आभा और चक्र प्रणाली) तथा कर्म के बीच मौजूद गहरे और सूक्ष्म संबंधों का परिणाम है।
संक्षेप में—
प्राण शक्ति सभी के लिए उपलब्ध है,
लेकिन हर व्यक्ति उसे स्वीकार करने और बनाए रखने में सक्षम नहीं होता।
आइए इसे क्रमबद्ध रूप से समझते हैं।

I. कुछ लोग प्राण ऊर्जा को ग्रहण करने में असमर्थ क्यों होते हैं?
1. मनोवैज्ञानिक प्रतिरोध
कुछ लोगों के मन में अनजाने ही ये विचार सक्रिय रहते हैं—
क्या यह सच में काम करता है?
मुझे इसकी आवश्यकता नहीं है।
ऐसी अचेतन आपत्तियाँ ऊर्जा-शरीर पर सीधा प्रभाव डालती हैं:
आभा सिकुड़ जाती है
चक्र पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाते
परिणामस्वरूप, प्राण ऊर्जा द्वार तक आकर वापस लौट जाती है।

2. गहरा भय, आघात और दमित भावनाएँ
लंबे समय तक संचित भावनाएँ जैसे—
उदासी
क्रोध
अपराध-बोध
निराशा
ये सभी जीवन-प्रवाह के मार्ग में दीवारें बन जाती हैं।
जब तक मन तैयार नहीं होता,
शरीर स्वतः उपचार स्वीकार नहीं कर सकता।

3. अहंकार और नियंत्रण की प्रवृत्ति
यह भाव—
“मुझे किसी की सहायता की आवश्यकता नहीं है।”
यह समझ अक्सर ज्ञान के बिना आती है।
इससे विशेष रूप से—
हृदय चक्र, सौर जाल (मणिपूरक) चक्र कठोर होकर बंद हो जाते हैं।
जहाँ विनम्रता नहीं होती,
वहाँ ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती।

4. कर्मिक पैटर्न
कुछ जीवन-स्थितियों में कष्ट अनुभव करना कर्मिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है।
उपचार असंभव नहीं होता
लेकिन वह अस्थायी या विलंबित हो सकता है
उपचार में देरी ≠ उपचार से इनकार

II. स्वीकार करने के बाद भी ऊर्जा क्यों लीक हो जाती है?
यह इस विषय का सबसे महत्वपूर्ण और व्यावहारिक पक्ष है।
1. आभा में दरार (Energy Leakage)
लगातार—
नकारात्मक विचार
आत्म-दोष
दूसरों की नकारात्मक भावनाओं को अपने ऊपर लेना
आभा को टूटे हुए पात्र जैसा बना देता है।
चाहे जितनी ऊर्जा भरी जाए,
वह बहती ही रहेगी।

2. आधारभूत ज्ञान का अभाव
शरीर-जागरूकता का अभाव
पृथ्वी से जुड़ाव की कमी
यदि मूलाधार चक्र कमजोर है, तो ऊर्जा टिक नहीं पाती।

3. जीवनशैली का उपचार के विरुद्ध होना
यदि दैनिक जीवन में—
अत्यधिक सोच
विषाक्त संबंध
नींद की कमी
नशा या अस्वस्थ भोजन
जारी रहे, तो
रोजमर्रा का जीवन ही उपचार से प्राप्त ऊर्जा को नष्ट कर देता है।

4. प्रार्थना और कृतज्ञता का अभाव
उपचार के बाद यदि—
व्यक्ति स्वयं प्रार्थना नहीं करता
कृतज्ञता का भाव नहीं रखता
तो ऊर्जा स्थिरता न पाकर लौटने लगती है।

III. प्राण ऊर्जा को बनाए रखने के व्यावहारिक उपाय
1. स्वीकार करने की स्पष्ट अनुमति दें
अपने भीतर ईमानदारी से कहें—
“मैं उपचार स्वीकार करता/करती हूँ।”
यह वाक्य आभा के द्वार खोलने की पहली कुंजी है।

2. सरल और स्थिर दिनचर्या
नंगे पाँव धरती पर चलना
श्वास पर ध्यान
पर्याप्त जल सेवन
ये सभी मूलाधार चक्र को सुदृढ़ करते हैं।

3. प्रतिदिन एक मंत्र का जाप
कोई जटिलता आवश्यक नहीं।
जो सहज लगे, वही पर्याप्त है—
🕉️ “सोऽहम्”
या
🕉️ “अहम् ब्रह्मास्मि”
मंत्र एक ध्वनि-कवच है,
जो ऊर्जा को स्थिर और सुरक्षित रखता है।

4. कृतज्ञता का भाव
स्वस्थ अनुभव करने के बाद मन में कहें—
“मुझे यहाँ तक लाने के लिए धन्यवाद।”
कृतज्ञता आभा-मंडल को मजबूत बनाती है।
निष्कर्ष
उपचार कोई एक घटना नहीं है।
उपचार एक अवस्था है।
यदि जीवन-शक्ति देना चिकित्सक का कार्य है,
तो उसे बनाए रखना व्यक्ति की चेतना और जीवनशैली पर निर्भर करता है।
जब आप—
मन को खोलते हैं
अहंकार को ढीला करते हैं
और जीवन के साथ सहयोग करते हैं
तो प्राण ऊर्जा स्वयं स्थिर हो जाती है।

പ്രാണശക്തി സ്വീകരിക്കപ്പെടാത്തതും ചോർന്നുപോകുന്നതും എന്ത് കൊണ്ട്?

പ്രാണശക്തി സ്വീകരിക്കപ്പെടാത്തതും ചോർന്നുപോകുന്നതും – കാരണം, ആത്മശാസ്ത്രം, പ്രായോഗിക മാർഗങ്ങൾ

പ്രാണിക് ഹീലിംഗ്, പ്രാണശക്തി, ഊർജ്ജചികിത്സ തുടങ്ങിയ വിഷയങ്ങളിൽ ദീർഘകാലമായി ചോദിക്കപ്പെടുന്ന ഒരു ഗഹനവും സത്യസന്ധവുമായ ചോദ്യം ഉണ്ട്:

എന്തുകൊണ്ടാണ് ചിലർക്ക് പ്രാണശക്തി കൊടുത്താലും അത് സ്വീകരിക്കപ്പെടാത്തത്?
സ്വീകരിച്ചാലും കുറച്ച് കഴിഞ്ഞാൽ അതു ചോർന്നുപോകുന്നത് എന്തുകൊണ്ട്?

ഇത് വെറും വിശ്വാസത്തിന്റെ പ്രശ്നമല്ല. മനസ്സ്, വികാരം, ഊർജ്ജശരീരം (Aura–Chakra system), കർമ്മം എന്നിവ തമ്മിലുള്ള ആഴമുള്ള ബന്ധത്തിന്റെ ഫലമാണ്.

ചുരുക്കത്തിൽ പറഞ്ഞാൽ —

പ്രാണശക്തി എല്ലാവർക്കും ലഭ്യമാണ്,
പക്ഷേ എല്ലാവർക്കും അത് സ്വീകരിക്കാനും നിലനിർത്താനും കഴിയണമെന്നില്ല.

ഇത് ഇപ്പോൾ ഘട്ടംഘട്ടമായി പരിശോധിക്കാം.

1️⃣ എന്തുകൊണ്ട് ചിലർക്ക് പ്രാണശക്തി സ്വീകരിക്കാൻ കഴിയുന്നില്ല?

1. മാനസിക പ്രതിരോധം (Psychological Resistance)

ചിലരുടെ ഉള്ളിൽ അറിവില്ലാതെ ഉണ്ടാകുന്ന ചോദ്യങ്ങൾ:

“ഇതെല്ലാം സത്യമാണോ?”
“എനിക്കിതൊന്നും വേണ്ടയോ?”

ഇത്തരം അവബോധമില്ലാത്ത എതിർപ്പ് ഉണ്ടെങ്കിൽ:

Aura സ്വയം ചുരുങ്ങും
Chakras പൂർണ്ണമായി തുറക്കുകയില്ല

അപ്പോൾ പ്രാണശക്തി വാതിൽ വരെ വന്ന് മടങ്ങുന്നു.

2. ശക്തമായ ഭയം, ട്രോമ, അടക്കിവെച്ച വികാരങ്ങൾ

ദീർഘകാലമായി അടിഞ്ഞുകൂടിയ:
ദുഃഖം
കോപം
കുറ്റബോധം
നിരാശ
ഇവയെല്ലാം പ്രാണവാഹിനികളെ അടയ്ക്കുന്ന മതിലുകളാണ്.

മനസ്സ് തയ്യാറാകാതെ ശരീരം മാത്രം healing സ്വീകരിക്കില്ല.

3. Ego / Control Pattern

“എനിക്ക് ആരുടെയും സഹായം വേണ്ട”

ഈ ധാരണ അറിവില്ലാതെ തന്നെ:
Heart Chakra
Solar Plexus Chakra
എന്നിവയെ കടുപ്പിക്കുകയും അടയ്ക്കുകയും ചെയ്യുന്നു. സ്വീകരിക്കാനുള്ള വിനയം ഇല്ലെങ്കിൽ പ്രാണം പ്രവേശിക്കില്ല.

4. കർമ്മബന്ധങ്ങൾ (Karmic Pattern)

ചിലർക്കുള്ള കഷ്ടത അനുഭവിച്ചേ തീരേണ്ടതാണ്. അവർക്ക്
Healing താൽക്കാലികമായിരിക്കും

Healing delay ≠ Healing denial
(വൈകിയെത്തുന്ന healing ഇല്ലായ്മയല്ല.)

2️⃣ സ്വീകരിച്ചാലും കുറച്ച് കഴിഞ്ഞാൽ energy ചോർന്നുപോകുന്നതെന്തുകൊണ്ട്?
ഇതാണ് ഈ വിഷയത്തിലെ അത്യന്തം പ്രധാനപ്പെട്ട ഭാഗം.

1. Aura-യിൽ crack / leakage

തുടർച്ചയായ:
നെഗറ്റീവ് ചിന്തകൾ
സ്വയം കുറ്റപ്പെടുത്തൽ
മറ്റുള്ളവരുടെ നെഗറ്റിവിറ്റി ഏറ്റെടുക്കൽ

Aura ഒരു പൊട്ടിയ പാത്രം പോലെയാകും.
പ്രാണം നിറച്ചാലും അത് ഒഴുകിപ്പോകും.

2. Grounding ഇല്ലായ്മ

ശരീരബോധം കുറവ്
ഭൂമിയുമായി ബന്ധമില്ലായ്മ. Root Chakra ദുർബലമാണെങ്കിൽ energy നിലനിൽക്കില്ല.

3. ജീവിതശൈലി Healing-ന് എതിരായാൽ

അമിതമായ overthinking
നെഗറ്റീവ് ബന്ധങ്ങൾ
ഉറക്കക്കുറവ്
ലഹരി, വിഷമയ ഭക്ഷണം

Healing വഴി കിട്ടിയ energy-യെ ദൈനംദിന ജീവിതം തന്നെ കഴുകിക്കളയും.

4. പ്രാർത്ഥനയും നന്ദിയും ഇല്ലായ്മ

Healing സ്വീകരിച്ചിട്ടും:
സ്വയം prayer ഇല്ല
Gratitude ഇല്ല. അപ്പോൾ പ്രാണം സ്ഥിരത തേടി മടങ്ങും.

3️⃣ പ്രാണശക്തി നിലനിർത്താൻ എന്ത് ചെയ്യണം?

1. സ്വീകരിക്കാൻ സമ്മതിക്കുക
ഉള്ളിൽ സത്യമായി പറയുക:
“ഞാൻ healing സ്വീകരിക്കുന്നു.”
ഇത് aura തുറക്കുന്ന ആദ്യ കീയാണ്.

2. ലളിതമായ ദിനചര്യ

ഭൂമിയിൽ നഗ്‌ന്നപാദം ആയി നിൽക്കുക (barefoot grounding)
ശ്വാസബോധം
മതിയായ വെള്ളം
ഇവ Root Chakra ശക്തമാക്കും.

3. ദിവസേന ഒരു മന്ത്രം

നിങ്ങൾക്ക് ഇഷ്ടമുള്ളത് മതിയാകും:

🕉️ “സോഽഹം”
അല്ലെങ്കിൽ
🕉️ “അഹം ബ്രഹ്മാസ്മി”

മന്ത്രം energy-യെ സ്ഥിരപ്പെടുത്തുന്ന ശബ്ദകവചമാണ്.

4. നന്ദി (Gratitude)
Healing കഴിഞ്ഞ് മനസ്സിൽ പറയുക:
“എനിക്ക് ലഭിച്ചതിന് നന്ദി.”
ഇത് aura-യെ seal ചെയ്യുന്നു.

ഉപസംഹാരം
Healing ഒരു സംഭവം അല്ല.
Healing ഒരു നിലയാണ്.

പ്രാണം നൽകുന്നത് healer-ന്റെ പ്രവർത്തിയാണെങ്കിൽ,
പ്രാണം നിലനിർത്തുന്നത് സ്വന്തം ബോധവും ജീവിതശൈലിയും ആണെന്ന് മനസ്സിലാക്കണം.

നിങ്ങളുടെ മനസ്സ് തുറക്കുമ്പോൾ,
പ്രാണശക്തി സ്വയം സ്ഥിരമാകും.

Saturday, 20 December 2025

जीवन के सूक्ष्म आयाम

जीवन के सूक्ष्म आयाम
जीवन केवल परिश्रम से ही आगे नहीं बढ़ता। हर दिखाई देने वाली क्रिया के पीछे एक अदृश्य व्यवस्था कार्य कर रही होती है —

जीवन का संपूर्ण प्रवाह
चेतना → संकल्प → भावना → कंपन → शब्द / कर्म → प्राण प्रवाह → शरीर व मन → परिवेश → कर्म की अभिव्यक्ति → मौन → कृपा — अंतिम बोध

जब इन सूक्ष्म आयामों को समझा जाता है, तब जीवन संघर्ष नहीं रहता; वह एक सहज प्रवाह बन जाता है।
आधुनिक मनोविज्ञान और प्राचीन आत्मविद्या के संगम से प्रस्तुत यह लेख जीवन का एक समग्र दर्शन है।

1. चेतना (चैतन्य) — मूल स्रोत
विचार से पहले, भावना से पहले, कर्म से पहले — चेतना होती है।
जिस पर आप ध्यान देते हैं, वही बढ़ता है
जहाँ चेतना होती है, वहीं ऊर्जा प्रवाहित होती है
अवचेतन जीवन बार-बार पीड़ा रचता है
चेतना विचार नहीं है — वह शांत साक्षीभाव है।
जीवन परिस्थितियाँ बदलने से नहीं, चेतना गहराने से बदलता है।

2. संकल्प (उद्देश्य) — दिशा
चेतना को रूप देने का कार्य संकल्प करता है।
वही कर्म + अलग संकल्प = अलग परिणाम
संकल्प अवचेतन मन को प्रोग्राम करता है
स्पष्ट संकल्प मन-शरीर-ऊर्जा को एक करता है
संकल्प के बिना ऊर्जा बिखरती है;
संकल्प के साथ छोटा प्रयास भी शक्तिशाली बनता है।

3. भावना (भाव) — बीज ऊर्जा
भाव जीवन का भावनात्मक चार्ज है।
प्रेम ऊर्जा को विस्तार देता है
भय ऊर्जा को संकुचित करता है
कृतज्ञता शांति लाती है
द्वेष विषाक्तता पैदा करता है
दोहराई जाने वाली भावनाएँ स्वभाव बनती हैं,
और स्वभाव ही आगे चलकर भाग्य बनता है।
जैसा भाव, वैसा ही भव।

4. कंपन (स्पंदन) — ऊर्जा क्षेत्र
सब कुछ कंपन करता है — विचार, भाव, शब्द, कोशिकाएँ।
उच्च कंपन: स्पष्टता, स्वास्थ्य, सामंजस्य
निम्न कंपन: भ्रम, रोग, संघर्ष
जीवन वह नहीं देता जो आप चाहते हैं,
बल्कि वह आकर्षित करता है जो आप कंपन करते हैं।

5. शब्द / ध्वनि (वाक् / नाद) — सक्रियकरण
शब्द सृजन-शक्ति है।
शब्दों में संकल्प, भावना और कंपन समाहित होते हैं
कठोर शब्द ऊर्जा का क्षय करते हैं
सत्य और कोमल शब्द प्राण को स्थिर करते हैं
मंत्र विश्वास से नहीं,
ध्वनि-संरचना की शुद्धता से कार्य करते हैं।
मौन — शब्द की परम अवस्था है।

6. श्वास और प्राण — जीवन शक्ति
प्राण जीवन को सक्रिय रखने वाली शक्ति है।
दुर्बल प्राण → भय, थकान, भ्रम
संतुलित प्राण → आत्मविश्वास, अंतःप्रज्ञा, उपचार-शक्ति
श्वास शरीर और मन के बीच सेतु है।
श्वास को नियंत्रित करने से
भावनाएँ, विचार और स्वास्थ्य प्रभावित होते हैं।

7. शरीर — साधन
शरीर चेतना से अलग नहीं; वह उसका वाहन है।
तनाव ऊर्जा को रोकता है
शांति प्रवाह को पुनः स्थापित करती है
देह-भंगिमा मानसिक अवस्था को प्रभावित करती है
नींद प्राण को नवीनीकृत करती है
योग, गति और विश्राम —
सब ऊर्जा-स्वच्छता ही हैं।

8. मन — प्रोसेसर
मन संसार के अनुभवों को संसाधित करता है।
अतिचिंतन ऊर्जा को चूसता है
स्थिरता स्पष्टता देती है
अनुशासन मन को शांत करता है
लक्ष्य मन को नष्ट करना नहीं,
बल्कि उसे चेतना का सेवक बनाना है।

9. स्मृति और कर्म (संस्कार) — पृष्ठभूमि प्रोग्राम
अतीत के अनुभव ऊर्जा-चिह्न छोड़ते हैं।
आघात ऊर्जा को जकड़ देता है
अपूर्ण भावनाएँ पुनरावृत्ति रचती हैं
उपचार = मुक्त करना
कर्म दंड नहीं;
वह अवचेतन आदत है।
चेतना कर्म-चक्र को तोड़ती है।

10. परिवेश (देश-काल-पात्र) — प्रभाव
स्थान, समय और संगति जीवन को आकार देते हैं।
शुद्ध स्थान स्पष्टता देते हैं
प्रकृति संतुलन लौटाती है
लोग कंपन को प्रभावित करते हैं
पोषक परिवेश का चयन करें।

11. अनुशासन (अभ्यास) — स्थिरता
प्रेरणा आती-जाती है; अभ्यास बना रहता है।
दैनिक अभ्यास आंतरिक शक्ति बढ़ाता है
छोटा पर नियमित प्रयास बड़ा परिवर्तन लाता है
अनुशासन बल नहीं,
स्व-सम्मान है।

12. मौन — एकीकरण
मौन बिखरी ऊर्जा को समेटता है।
मौन शांति देता है
मौन सत्य प्रकट करता है
मौन प्राण को पुनर्स्थापित करता है
शब्दों के बीच भी
अंदर की निस्तब्धता ही सच्चा मौन है।

13. समर्पण और कृपा — गुणक
कृपा प्रयास से परे है।
अहं के शमन से जीवन बहने लगता है
समर्पण कमजोरी नहीं, विश्वास है
जब प्रयास और विनय एक होते हैं,
तभी कृपा उतरती है।

जीवन को जीतना नहीं है —
उसके साथ सुर में बहना है।
जब चेतना स्पष्ट हो,
संकल्प शुद्ध हो,
भावनाएँ संतुलित हों,
और प्राण स्वतंत्र रूप से बहें —
तब जीवन स्वाभाविक रूप से अर्थपूर्ण, स्वस्थ और शांत हो जाता है।

अंदर का संसार संतुलित होते ही
बाहर का संसार स्वयं व्यवस्थित हो जाता है।
बोधपूर्वक जीने पर, जीवन स्वयं एक साधना बन जाता है।
— अनूप मेनन, 19:00

ജീവിതത്തിന്റെ സൂക്ഷ്മ അംശങ്ങൾ

ജീവിതം വെറും പരിശ്രമം കൊണ്ടു മാത്രം മുന്നോട്ട് പോകുന്നതല്ല. ഓരോ ദൃശ്യ പ്രവർത്തനത്തിനും പിന്നിൽ അദൃശ്യമായ ഒരു സംവിധാനം പ്രവർത്തിക്കുന്നു -

ജീവിതത്തിന്റെ സമ്പൂർണ്ണ പ്രവാഹം
`ബോധം → ഉദ്ദേശ്യം → വികാരം → കമ്പനനം → വാക്ക് / പ്രവർത്തനം → പ്രാണപ്രവാഹം → ശരീരം & മനസ്സ് → പരിസരം → കർമ്മത്തിന്റെ പ്രകടനം → മൗനം → കൃപ ` അന്തിമ ചിന്ത
 
ഈ സൂക്ഷ്മ അംശങ്ങളെ മനസ്സിലാക്കുമ്പോൾ, ജീവിതം ഒരു പോരാട്ടമല്ല; ഒരു പ്രവാഹമായി മാറുന്നു.
 
ആധുനിക മനഃശാസ്ത്രവും പ്രാചീന ആത്മവിദ്യയും ഒന്നിക്കുന്ന ജീവിതത്തിന്റെ സമ്പൂർണ്ണ ദർശനമാണ് ഈ ലേഖനം.
  
1. ബോധം (ചൈതന്യം) — മൂലസ്രോതസ്
 
ചിന്തക്ക് മുമ്പ്, വികാരത്തിനുമുമ്പ്, പ്രവർത്തനത്തിനുമുമ്പ് — ബോധം ഉണ്ട്.
  
- നിങ്ങൾ ശ്രദ്ധിക്കുന്നതു വളരുന്നു
 
- ബോധം നിലനിൽക്കുന്നിടത്തേക്ക് ഊർജ്ജം ഒഴുകുന്നു
 
- അവബോധമില്ലാത്ത ജീവിതം ആവർത്തിച്ച വേദന സൃഷ്ടിക്കുന്നു
 
ബോധം ചിന്തയല്ല — അത് ശാന്തമായ സാക്ഷിത്വമാണ്.
 
സാഹചര്യങ്ങൾ മാറുമ്പോൾ അല്ല, ബോധം ആഴപ്പെടുമ്പോഴാണ് ജീവിതം മാറുന്നത്.
  
2. ഉദ്ദേശ്യം (സങ്കൽപം) — ദിശ
 
ബോധത്തിന് രൂപം നൽകുന്നതാണ് ഉദ്ദേശ്യം.
 
- ഒരേ പ്രവർത്തി + വ്യത്യസ്ത ഉദ്ദേശ്യം = വ്യത്യസ്ത ഫലം
 
- ഉദ്ദേശ്യം അവബോധമില്ലാത്ത മനസ്സിനെ പ്രോഗ്രാം ചെയ്യുന്നു
 
- വ്യക്തമായ സങ്കൽപം മനസ്സ്–ശരീരം–ഊർജ്ജം ഒന്നിപ്പിക്കുന്നു
 
ഉദ്ദേശ്യമില്ലെങ്കിൽ ഊർജ്ജം ചിതറുന്നു; ഉദ്ദേശ്യമുണ്ടെങ്കിൽ ചെറിയ ശ്രമവും ശക്തമാകും.
  
3. വികാരം (ഭാവം) — വിത്ത് ഊർജ്ജം
 
ജീവിതത്തിന്റെ വികാരചാർജ്ജാണ് ഭാവം.
  
- സ്നേഹം ഊർജ്ജം വികസിപ്പിക്കുന്നു
 
- ഭയം ഊർജ്ജം ചുരുക്കുന്നു
 
- കൃതജ്ഞത ശാന്തമാക്കുന്നു
 
- വിരോധം വിഷമാക്കുന്നു
 
ആവർത്തിക്കുന്ന വികാരങ്ങൾ സ്വഭാവമായി, സ്വഭാവം വിധിയായി മാറുന്നു.
 
ഭാവം പോലെ തന്നെ ഭവനവും.
  
4. കമ്പനനം (സ്പന്ദനം) — ഊർജ്ജമേഖല
 
എല്ലാം കമ്പനിക്കുന്നു — ചിന്തകൾ, വികാരങ്ങൾ, വാക്കുകൾ, കോശങ്ങൾ.
 
- ഉയർന്ന കമ്പനനം: വ്യക്തത, ആരോഗ്യം, സൗഹാർദ്ദം
 
- താഴ്ന്ന കമ്പനനം: ആശയക്കുഴപ്പം, രോഗം, സംഘർഷം
 
നിങ്ങൾ ആഗ്രഹിക്കുന്നതല്ല, നിങ്ങൾ കമ്പനം ചെയ്യുന്നതിനെ ആണ് ജീവിതം ആകർഷിക്കുന്നത്.
  
5. ശബ്ദം / വാക്ക് (വാക് / നാദം) — സജീവീകരണം
 
ശബ്ദം സൃഷ്ടിശക്തിയാണ്.
 
- വാക്കുകളിൽ ഉദ്ദേശ്യവും വികാരവും കമ്പനനവും അടങ്ങിയിരിക്കുന്നു
 
- കടുത്ത വാക്കുകൾ ഊർജ്ജ ചോർച്ച സൃഷ്ടിക്കുന്നു
 
- സത്യവും മൃദുവുമായ വാക്കുകൾ പ്രാണനെ സ്ഥിരപ്പെടുത്തുന്നു
 
മന്ത്രങ്ങൾ വിശ്വാസം കൊണ്ടല്ല, ശബ്ദക്രമത്തിന്റെ കൃത്യത കൊണ്ടാണ് പ്രവർത്തിക്കുന്നത്.
 
മൗനം ശബ്ദത്തിന്റെ പരമാവധി രൂപമാണ്.
  
6. ശ്വാസവും പ്രാണനും — ജീവശക്തി
 
ജീവിതത്തെ സജീവമാക്കുന്ന ശക്തിയാണ് പ്രാണൻ.
 
- ദുർബല പ്രാണൻ → ഭയം, ക്ഷീണം, ആശയക്കുഴപ്പം
 
- സമതുലിത പ്രാണൻ → ആത്മവിശ്വാസം, അന്തർബോധം, ചികിത്സാശക്തി
 
ശ്വാസം ശരീരവും മനസ്സും ബന്ധിപ്പിക്കുന്ന പാലമാണ്.
 
ശ്വാസത്തെ നിയന്ത്രിച്ചാൽ, വികാരങ്ങളും ചിന്തകളും ആരോഗ്യവും സ്വാധീനിക്കാം.
 
7. ശരീരം (ശരീര) — ഉപകരണം
 
ശരീരം ചേതനയിൽ നിന്ന് വേറിട്ടതല്ല; അത് അതിന്റെ വാഹനം ആണ്.
 
- സംഘർഷം ഊർജ്ജം തടയും
 
- ശാന്തത പ്രവാഹം പുനസ്ഥാപിക്കും
 
- ശരീരഭാവം മാനസികാവസ്ഥയെ ബാധിക്കും
 
- ഉറക്കം പ്രാണനെ പുതുക്കും
 
യോഗം, ചലനം, വിശ്രമം — എല്ലാം **ഊർജ്ജ ശുചിത്വം** തന്നെയാണ്.
  
8. മനസ്സ് (മനസ്) — പ്രോസസ്സർ
 
ലോകത്തിൽ നിന്നുള്ള അനുഭവങ്ങൾ മനസ്സ് പ്രോസസ്സ് ചെയ്യുന്നു.
 
- അമിതചിന്ത ഊർജ്ജം ചോർത്തും
 
- നിശ്ചലത വ്യക്തത നൽകും
 
- ശാസനം മനസ്സിനെ ശാന്തമാക്കും
 
ലക്ഷ്യം മനസ്സിനെ നശിപ്പിക്കുക അല്ല; ബോധത്തിന് സേവകനാക്കുക എന്നതാണ്.
  
9. സ്മരണയും കർമ്മവും (സംസ്കാരം) — പശ്ചാത്തല പ്രോഗ്രാം
 
കഴിഞ്ഞ അനുഭവങ്ങൾ ഊർജ്ജമുദ്രകൾ വിടുന്നു.
 
- ട്രോമ ഊർജ്ജം മുറുകുന്നു
 
- പരിഹരിക്കാത്ത വികാരങ്ങൾ ആവർത്തനം സൃഷ്ടിക്കുന്നു
 
- ചികിത്സ = വിടുതൽ
 
കർമ്മം ശിക്ഷയല്ല; അവബോധമില്ലാത്ത ശീലം ആണ്.
 
ബോധം കർമ്മചക്രം തകർക്കുന്നു.
  
10. പരിസരം (ദേശ–കാല–പാത്രം) — സ്വാധീനം
 
സ്ഥലം, സമയം, കൂട്ടുകാർ — എല്ലാം ജീവിതത്തെ രൂപപ്പെടുത്തുന്നു.
 
- ശുദ്ധമായ ഇടങ്ങൾ വ്യക്തത നൽകും
 
- പ്രകൃതി സമതുലിതമാക്കും
 
- മനുഷ്യർ കമ്പനനത്തെ സ്വാധീനിക്കും
 
പോഷിപ്പിക്കുന്ന പരിസരം തിരഞ്ഞെടുക്കുക.
  
11. ശാസനം (അഭ്യാസം) — സ്ഥിരത
 
പ്രചോദനം വരും പോകും; അഭ്യാസം നിലനിൽക്കും.
 
- ദൈനംദിന അഭ്യാസം അന്തർശക്തി വളർത്തും
 
- ചെറുതെങ്കിലും സ്ഥിരമായ ശ്രമം വലിയ മാറ്റം സൃഷ്ടിക്കും
 
ശാസനം ബലപ്രയോഗമല്ല; സ്വയം ബഹുമാനം ആണ്.
  
12. മൗനം — ഏകീകരണം
 
മൗനം ചിതറുന്ന ഊർജ്ജം കൂട്ടിച്ചേർക്കുന്നു.
 
- മൗനം ശാന്തമാക്കുന്നു
 
- മൗനം സത്യം വെളിപ്പെടുത്തുന്നു
 
- മൗനം പ്രാണനെ പുനസ്ഥാപിക്കുന്നു
 
ശബ്ദത്തിനിടയിലും ഉള്ളിലെ നിശ്ശബ്ദതയാണ് യഥാർത്ഥ മൗനം.
  
13. സമർപ്പണവും കൃപയും (അനുഗ്രഹം) — ഗുണകം
 
ശ്രമത്തിന് അപ്പുറമാണ് കൃപ.
 
- അഹം ശമിക്കുമ്പോൾ ജീവിതം ഒഴുകുന്നു
 
- സമർപ്പണം ദൗർബല്യമല്ല; വിശ്വാസമാണ്
 
ശ്രമവും വിനയവും ഒന്നിക്കുമ്പോഴാണ് കൃപ വരുന്നത്.
 
ജീവിതം കീഴടക്കാനുള്ള ഒന്നല്ല — അനുസൃതമാക്കേണ്ട ഒന്നാണ്.
 
ബോധം വ്യക്തമായാൽ, ഉദ്ദേശ്യം ശുദ്ധമായാൽ, വികാരങ്ങൾ സമതുലിതമായാൽ, പ്രാണൻ സ്വതന്ത്രമായി ഒഴുകുമ്പോൾ — ജീവിതം സ്വാഭാവികമായി അർത്ഥവത്തും ആരോഗ്യകരവും ശാന്തവുമായിത്തീരും.
 
ഉള്ളിലെ ലോകം നിയന്ത്രിച്ചാൽ, പുറത്തുള്ള ലോകം സ്വയം ക്രമീകരിക്കും.
 
ബോധപൂർവ്വം ജീവിക്കുമ്പോൾ, ജീവിതം തന്നെ ഒരു ആത്മസാധനയായി മാറുന്നു.

Tuesday, 9 December 2025

lakshmi pooja vidhi

1 . देवी लक्ष्मी को पुष्प में कमल व गुलाब प्रिय है।
 
2 . फल में श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े प्रिय हैं।

3 . सुगंध में केवड़ा, गुलाब, चंदन के इत्र का प्रयोग इनकी पूजा में अवश्य करें। 
 
4 . अनाज में चावल पसंद है। 
 
5 . मिठाई में घर में बनी शुद्धता पूर्ण केसर की मिठाई या हलवे का नैवेद्य उपयुक्त है। 
 
6 . प्रकाश के लिए गाय का घी, मूंगफली या तिल्ली का तेल मां को शीघ्र प्रसन्न करता है। 
 
7 . मां लक्ष्मी को स्वर्ण आभूषण प्रिय हैं। 
 
8 . मां लक्ष्मी को रत्नों से विशेष स्नेह है। 
 
9 . उनकी अन्य प्रिय सामग्री में गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, सिंदूर, भोजपत्र शामिल हैं। 
 
10. मां लक्ष्मी के पूजन स्थल को गाय के गोबर से लीपा जाना चाहिए 
 
11. ऊन के आसन पर बैठकर लक्ष्मी पूजन करने से तत्काल फल मिलता है। 
 
अत: इनका लक्ष्मी पूजन में उपयोग अवश्य करना चाहिए।

* कैसे करें लक्ष्मी पूजन की तैयारी 
 
सबसे पहले चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां रखें उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे। 

क्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। 
 
पूजनकर्ता मूर्तियों के सामने की तरफ बैठें। 
 
कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। 
 
नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक है।
 
दो बड़े दीपक रखें। एक घी का, दूसरा तेल का। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें व दूसरा मूर्तियों के चरणों में। एक दीपक गणेशजी के पास रखें।
 
मूर्तियों वाली चौकी के सामने छोटी चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। 
 
कलश की ओर एक मुट्ठी चावल से लाल वस्त्र पर नवग्रह की प्रतीक नौ ढेरियां बनाएं। 
 
गणेशजी की ओर चावल की सोलह ढेरियां बनाएं। ये सोलह मातृका की प्रतीक हैं। नवग्रह व षोडश मातृका के बीच स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।
 
इसके बीच में सुपारी रखें व चारों कोनों पर चावल की ढेरी। 
 
सबसे ऊपर बीचोंबीच ॐ लिखें। छोटी चौकी के सामने तीन थाली व जल भरकर कलश रखें। 
 
थालियों की निम्नानुसार व्यवस्था करें- 1. ग्यारह दीपक, 2. खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर, कुंकुम, सुपारी, पान, 3. फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी-चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक।
 
अब विधि-विधान से पूजन करें।  
 
इन थालियों के सामने यजमान बैठे। आपके परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें। कोई आगंतुक हो तो वह आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पीछे बैठे।

चौकी 
(1) लक्ष्मी, (2) गणेश, (3-4) मिट्टी के दो बड़े दीपक, (5) कलश, जिस पर नारियल रखें, वरुण (6) नवग्रह, (7) षोडशमातृकाएं, (8) कोई प्रतीक, (9) बहीखाता, (10) कलम और दवात, (11) नकदी की संदूकची, (12) थालियां, 1, 2, 3, (13) जल का पात्र, (14) यजमान, (15) पुजारी, (16) परिवार के सदस्य, (17) आगंतुक।
महालक्ष्मी पूजन की सरल विधि 
 
समस्त सामग्री एकत्र करने के बाद और सारी तैयारी पूरी होने के बाद कैसे करें महालक्ष्मी की पूजा, जानें यहां 
 
सबसे पहले पवित्रीकरण करें।
 
आप हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा सा जल ले लें और अब उसे मूर्तियों के ऊपर छिड़कें। साथ में मंत्र पढ़ें। 

इस मंत्र और पानी को छिड़ककर आप अपने आपको पूजा की सामग्री को और अपने आसन को भी पवित्र कर लें।
 
ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः
कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥
 
अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को प्रणाम करके मंत्र बोलें-

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः
 
अब आचमन करें
पुष्प, चम्मच या अंजुलि से एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ केशवाय नमः
और फिर एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ नारायणाय नमः
फिर एक तीसरी बूंद पानी की मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ वासुदेवाय नमः
 
फिर ॐ हृषिकेशाय नमः कहते हुए हाथों को खोलें और अंगूठे के मूल से होंठों को पोंछकर हाथों को धो लें। पुनः तिलक लगाने के बाद प्राणायाम व अंग न्यास आदि करें। आचमन करने से विद्या तत्व, आत्म तत्व और बुद्धि तत्व का शोधन हो जाता है तथा तिलक व अंग न्यास से मनुष्य पूजा के लिए पवित्र हो जाता है।
 
आचमन आदि के बाद आंखें बंद करके मन को स्थिर कीजिए और तीन बार गहरी सांस लीजिए। यानी प्राणायाम कीजिए क्योंकि भगवान के साकार रूप का ध्यान करने के लिए यह आवश्यक है। फिर पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है। उसके लिए हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा जल लेकर स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए परम पिता परमात्मा को प्रणाम किया जाता है। फिर पूजा का संकल्प किया जाता है। संकल्प हर एक पूजा में प्रमुख होता है।
संकल्प - आप हाथ में अक्षत लें, पुष्प और जल ले लीजिए। कुछ द्रव्य भी ले लीजिए। द्रव्य का अर्थ है कुछ धन। ये सब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों। सबसे पहले गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए। उसके बाद वरुण पूजा यानी कलश पूजन करनी चाहिए।
 
हाथ में थोड़ा सा जल ले लीजिए और आह्वान व पूजन मंत्र बोलिए और पूजा सामग्री चढ़ाइए। फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए। इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है। हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प ले लीजिए। सोलह माताओं को नमस्कार कर लीजिए और पूजा सामग्री चढ़ा दीजिए।

सोलह माताओं की पूजा के बाद रक्षाबंधन होता है। रक्षाबंधन विधि में मौली लेकर भगवान गणपति पर चढ़ाइए और फिर अपने हाथ में बंधवा लीजिए और तिलक लगा लीजिए। अब आनंदचित्त से निर्भय होकर महालक्ष्मी की पूजा प्रारंभ कीजिए। जो भी मंत्र,माला, पाठ और स्तोत्र पढ़ना है वह आप कर सकते हैं।

Wednesday, 26 November 2025

मानव सूक्ष्म शरीर में ऊर्जा प्रणाली

मानव सूक्ष्म शरीर में शामिल हैं:

आभा परतें (aura)
7/21/114 चक्र
72000 नाड़ियाँ
3 ग्रंथियां
ऊर्जा कॉर्ड
मर्म बिंदु
प्राण वायु सिस्टम
कोशा परतें
बिन्दु
कुंडलिनी + सुषुम्ना प्रणाली
सूक्ष्म गांठें और मानसिक बिंदु

Aura layers
7/21/114 Chakras
72000 Nadis
3 Granthis
Energy Cords
Marma points
Prana-Vayu system
Kosha Layers
Bindu
Kundalini + Sushumna System
Subtle knots & psychic points)

यह सब है “मानव सूक्ष्म शरीर की ऊर्जा शरीर रचना”।

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और प्राचीन योग विज्ञान एक ही बात कहते हैं -
यदि शरीर में ऊर्जा का प्रवाह सुचारू है, तो स्वास्थ्य और मानसिक स्पष्टता बढ़ेगी।यदि  ऊर्जा अवरुद्ध है, तो
तनाव
डर
यौन असंतुलन
भावनात्मक दर्द
बहुत ज़्यादा सोचना
थकान
आभा मंदता
ये सब वहाँ होंगे.

यह ब्लॉग मानव शरीर का सबसे सम्पूर्ण ऊर्जा मानचित्र है।

1. ओरा (आभा) – ऊर्जा क्षेत्र
आभा एक व्यक्ति के चारों ओर स्थित 7-परत ऊर्जा कवच है।

आभा की परतें
1. शारीरिक
2.  ईथरिक बॉडी से 2-3 सेमी बाहर
3. भावनात्मक
4. मानसिक
5. एस्ट्रल
6. ईथरिक टेम्पलेट
7. कारणात्मक
ये शरीर के चारों ओर 360° का “आभामंडल” बनाते हैं।

आभा फीकी पड़ने के कारण
तनाव
दु: ख
बहुत ज़्यादा सोचना
डाह करना
यौन ऊर्जा असंतुलन
काली ऊर्जा का जोखिम
विषैले लोग

आभा मंद = मन मंद = जीवन मंद।

2. चक्र - ऊर्जा केंद्र
चक्र (प्रमुख, लघु, सूक्ष्म)
योग शास्त्र (सद्गुरु परंपरा) के अनुसार:
7 प्रमुख
21 माइनर
96 माइक्रो
3 गुप्त चक्र भी है

A.  शरीर में 7 मुख्य ऊर्जा केंद्र:
7 मुख्य चक्र
1. मूलाधार - जमीनीपन
2. स्वाधिष्ठान - यौन एवं भावनात्मक प्रवाह
3. मणिपुर - आत्मविश्वास, शक्ति
4. हृदय – प्रेम, क्षमा
5. कंठ – संचार
6. आज्ञा – अंतर्ज्ञान
7. सहस्रार - आध्यात्मिक संबंध

बी. लघु चक्र – 21
उदाहरण के लिए:
टखने का चक्र
घुटने का चक्र
थायराइड माइनर
कान, आँख और नाक के चक्र
यकृत, प्लीहा और अधिवृक्क चक्र

सी. सूक्ष्म चक्र – 114

डी. ललना चक्र, गुरु चक्र, हृत चक्र
ये गुप्त चक्र हैं जो मुख्य 7 चक्रों में शामिल नहीं हैं।

चक्र अवरुद्ध होने पर अनुभव किए जाने वाले परिवर्तन
मूलाधार → भय
स्वाधिष्ठान → रिश्ते संबंधी मुद्दे
मणिपुर → आत्मविश्वास में गिरावट
अनाहत → भावनात्मक पीड़ा
कंठ चक्र → गले का दबाव
आज्ञा → सिरदर्द, भ्रम
सहस्रार → शून्यता, वियोग

3. नाड़ियाँ - ऊर्जा चैनल
72,000 तंत्रिकाएँ.
प्रमुख 3:
इड़ा (चंद्रमा, शीतलता, मन)
पिंगला (सूर्य, ऊष्मा, ऊर्जा)
सुषुम्ना (केंद्रीय चैनल - कुंडलिनी पथ)

When Ida + Pingala balance = Sushumna opens.

अन्य:
गांधार, हस्तिजिह्वा, पूषा, सरस्वती, विश्वोदया

यशस्विनी, अलम्बुषा, कुक्षी
ये वे अन्य तंत्रिकाएं हैं जिनका उल्लेख तांत्रिक ग्रंथों में मिलता है।

4. ग्रंथियां (ग्रंथियां) - ऊर्जा गांठें
वे स्थान जहाँ मानव में अटकी हुई भावनाओं, अतीत के आघात, भय, अहंकार और आसक्ति के कारण ऊर्जा "बंधी" रहती है।

3 प्रमुख ग्रंथियाँ
1. ब्रह्म ग्रंथि – root & pelvic (fear, insecurity)
2. विष्णु ग्रन्थि - हृदय क्षेत्र (दर्द, भावनात्मक अवरोध)
3. रुद्र ग्रन्थि - भ्रूमध्य (अहंकार, भ्रम, मानसिक आघात)

जब ग्रंथियां खुलती हैं तो ऊर्जा तेजी से बढ़ती है।

कुछ तांत्रिक परम्पराएँ कहती हैं:
"एंडोक्रिन ग्लैंड्स" -
विभिन्न चक्रों के नीचे 24 छोटी ग्रंथियां भी होती हैं।

5. ऊर्जा कॉर्ड
दूसरों के साथ अदृश्य ऊर्जा संबंध बनते हैं।

डोरियों के प्रकार 
प्रेम कॉर्ड
अटैचमेंट कॉर्ड
यौन डोरियाँ
विषाक्त कॉर्ड
मानसिक कॉर्ड

3 मुख्य प्रकार:
1. भावनात्मक कॉर्ड
– रिश्ते, लगाव, डर, अतीत की यादें

2. मानसिक कॉर्ड
– संचार, विचार प्रक्रिया

3. आध्यात्मिक कॉर्ड
– मजबूत भावनात्मक संबंध (दुर्लभ)

तंत्र में इसे "सूत्र", "बंध" और "रज्जु" कहा जाता है।

यदि कोई नकारात्मक कॉर्ड है
→ थकान
→ उदासी
→ अवांछित विचार
→ ऊर्जा की हानि.

6. मर्म (जीवन शक्ति स्विच) बिंदु ( आयुर्वेद + सिद्ध)
शरीर में 107 ऊर्जा बिंदु ( तंत्रिका + प्राण + मांसपेशी जंक्शन)  कहाँ स्थित हैं -
सिर
दिल
नाभि
जोड़ों
अंग
तंत्रिकाओं और वाहिकाओं के प्रतिच्छेदन बिंदु

जब ये अवरुद्ध हो जाते हैं:
एनर्जी में गिरावट
दर्द
आत्मविश्वास में गिरावट
पाचन संबंधी समस्याएं

7. वायु प्रणाली (प्राणिक हवाएँ)
शरीर में पाँच प्राण + पाँच उप-प्राण:

मुख्य प्राण (पंच प्राण)
1. प्राण
2. अपान
3. समान
4. उदाना
5. व्यान

उप-प्राण (5 उप-ऊर्जाएँ)
1. साँप
2. कूर्म
3. क्रिकरा
4. देवदत्त
5. धनंजय

ये ही श्वास, पाचन, चेतना, वाणी, गति और नींद को नियंत्रित करते हैं।

8. कोशा परतें (ऊर्जा-आत्मा आवरण)
1. अन्नमय कोष - भौतिक शरीर
2. प्राणमय कोष - ऊर्जा शरीर
3. मनोमय कोष - मन
4. विज्ञानमय कोष - बुद्धि
5. आनंदमय कोष - आनंद/अति-चेतना

9. बिंदु - ऊर्जा बूंद
खोपड़ी के पीछे सूक्ष्म “सोमा ड्रॉप”।
यह बिंदु तभी सक्रिय होता है जब आप खेचरी मुद्रा + ध्यान करते हैं। खेचरी मुद्रा करने के लिए, जीभ को तालु से स्पर्श करें।

10. कुंडलिनी ऊर्जा
मूलाधार चक्र में कुंडलित ऊर्जा।
जब ग्रंथियां नरम हो जाएंगी, तंत्रिकाएं साफ हो जाएंगी, और आभा मजबूत हो जाएगी, तो यह सुरक्षित रूप से ऊपर उठ जाएगा।

ये 10 आत्मा और शरीर के बीच की परतें हैं।

आइए देखें कि इन सभी को साफ करने और ऊर्जा को सक्रिय करने के लिए सबसे वैज्ञानिक + योगिक तरीके क्या हैं  ।

A) आभा शुद्धिकरण विधियाँ
✔ नमक के पानी से स्नान
✔ संब्रानी / गुग्गल / सेज
✔ सूर्य के संपर्क में (10 मिनट)
✔ चंद्र स्नान (पूर्णिमा पर 15 मिनट)
✔ ओम जप कंपन
✔ विषाक्त लोगों और मानसिक विकारों से बचें

बी) चक्र सफाई विधियाँ
1. बीज मंत्र
एलएएम (मूलाधार चक्र)
VAM (सेक्स चक्र)
RAM (मणिपुर चक्र)
यम (हृदय चक्र)
HAM (गले का चक्र)
ओम (आज्ञा चक्र)
Silence for Sahasrara (सहस्रार/ब्रह्म chakra)

2. चक्र श्वास
प्रत्येक चक्र में 5 साँसें।
3. अनाहत के लिए भावनात्मक मुक्ति
गहरी आह “haa”

सी) नाड़ी शोधन - मास्टर क्लींजर
प्रतिदिन 10 मिनट → सम्पूर्ण ऊर्जा प्रणाली संतुलन।
फ़ायदे:
✓ चिंता कम
✓ मन की स्पष्टता
✓ Ida–Pingala balance
✓ तीसरी आँख की गतिविधि
✓ सुषुम्ना खुली

D) ग्रंथि खोलने की तकनीक
1. Moola Bandha → Brahma Granthi release
भय समाप्त हो जाता है, यौन ऊर्जा संतुलन होता है।
2. Uddiyana Bandha → Vishnu Granthi release
भावनाएँ और हृदय का अवरोध समाप्त हो जाता है।
3. Jalandhara Bandha → Rudra Granthi release
अहंकार, अतिविचार कम हो जाता है।
4. महाबंध (केवल जब आरामदायक हो)
सभी 3 ताले एक साथ → सबसे तेज़ ग्रन्थि सफाई।

ई) रस्सी काटने की रस्म (सबसे महत्वपूर्ण)
दृश्यीकरण + इरादा:
कहें, "यह ऊर्जा मेरी नहीं है। मैं इसे मुक्त करता हूँ।"  अगर आप इसे रोज़ाना 3 मिनट तक करें, तो आपको बहुत राहत मिलेगी।

एफ) ऊर्जा प्रवाह के लिए आहार
अच्छा खाएं 
नारियल पानी
घी 1 छोटा चम्मच
दूध + हल्दी
ताज़ा फल
लौकी का रस
शहद (सुबह)

टालना
अश्लील
शराब
धूम्रपान
देर रात तक नींद न आना
क्रोध और ईर्ष्या
अतिरिक्त मसाले

जी) ध्वनि और कंपन उपचार
तिब्बती गायन कटोरे
Rudraksha mala
लगभग 108 बार
Mridangam or tanpura drone
कंपन नकारात्मक क्षेत्रों को बाहर धकेलता है।

एच) सुरक्षा तकनीकें
स्वर्ण आभा बुलबुला दृश्य.
हनुमान कवचम / नरसिम्हा कवचम।

रोकता है: ईर्ष्या, बुरी नजर, मानसिक हमला।

ऊर्जा बढ़ाने वाली पूर्ण दिनचर्या (दैनिक)
सुबह (15 मिनट)
Nadi Shodhana
Moola bandha
Uddiyana bandha
Jalandhara bandha
चक्र श्वास

शाम (10 मिनट)
नमक स्नान / धुंधलापन
कॉर्ड कटिंग
भावनात्मक मुक्ति

रात्रि (5 मिनट)
सुषुम्ना रीढ़ का दृश्य
स्वर्ण ढाल

21 दिनों में आप जो बदलाव अनुभव करेंगे
✓ सिर हल्का हो जाता है
✓ भावनात्मक घाव भरते हैं
✓ आभा उज्ज्वल होती है
✓ आत्मविश्वास बढ़ता है
✓ यौन ऊर्जा स्थिर होती है
✓ अतिविचार समाप्त हो जाता है
✓ चक्र खुले हुए महसूस होते हैं
✓ रीढ़ की हड्डी में गर्मी / झुनझुनी
✓ गहरी नींद
✓ शांत मन
✓ आध्यात्मिक स्पष्टता

7. 7 ओम – 5 मिनट
परिणाम: पूर्ण सफाई + पूर्ण ऊर्जा सक्रियण।

चाहे कोई भी ऊर्जा प्रणाली हो,
यदि आप चाहते हैं कि सब कुछ स्वच्छ हो और एक ही प्रक्रिया से ऊर्जा बढ़े:

नाड़ी शोधन + भ्रामरी + ॐ

यह कॉम्बो को ancient yogic में “Trinity of Purification” कहता है।
नाडी शुद्धि 
आभा शुद्धि
कॉर्ड कट 
ग्रंथियां नरम हो जाती हैं
प्राण शक्ति को बढ़ावा
मन स्थिर
चक्र पुनर्भरण
कोश संरेखित करें

यह योग में ज्ञात सबसे सुरक्षित और मजबूत विधि है।
अनूप मेनन 03:21 पर

മനുഷ്യൻ്റെ സൂക്ഷ്മശരീരത്തിലെ എനർജി സിസ്റ്റം

മനുഷ്യശരീരത്തിലെ എനർജി സിസ്റ്റം:

മനുഷ്യൻ്റെ സൂക്ഷ്മശരീരം ഇതാണ് ഉൾക്കൊള്ളുന്നത്:

Aura layers
7/21/114 Chakras
72000 Nadis
3 Granthis
Energy Cords
Marma points
Prana-Vayu system
Kosha Layers
Bindu
Kundalini + Sushumna System
Subtle knots & psychic points

ഇതെല്ലാം കൂടി ആണ്
“Energy Anatomy of the Human Body”.

ആധുനിക മെഡിക്കൽ സയൻസും പ്രാചീന യോഗശാസ്ത്രവും ഒരേ കാര്യമാണ് പറയുന്നത് —
ശരീരത്തിൽ energy flow smooth ആണെങ്കിൽ ആരോഗ്യവും മനശ്ശുദ്ധിയും ഉയരും. Energy block ആണെങ്കിൽ
സമ്മർദ്ദം
പേടി
sexual imbalance
emotional pain
overthinking
fatigue
aura dullness
ഇവയെല്ലാം ഉണ്ടാകും.

ഈ ബ്ലോഗ് മനുഷ്യശരീരത്തിലെ ഏറ്റവും complete energy map ആണ്.

1. ഓറ (Aura) – Energy Field
ഓറ മനുഷ്യനെ ചുറ്റിയുള്ള 7–ലെയർ energy shield.

ഓറയുടെ ലെയറുകൾ
1. Physical
2. Etheric ശരീരത്തിന് 2–3 സെ.മീ പുറത്ത്
3. Emotional
4. Mental
5. Astral
6. Etheric Template
7. Causal
ഇവയാണ് ശരീരത്തെ ചുറ്റി 360° “ഓറ സെറ്റ്” രൂപപ്പെടുന്നത്.

ഓറ മങ്ങാൻ കാരണങ്ങൾ
Stress
Grief
Overthinking
jealousy
sexual energy imbalance
black energy exposure
toxic people

Aura dull = mind dull = life dull.

2. ചക്രങ്ങൾ (Chakras) – Energy Centers
ചക്രകൾ (Major, Minor, Micro)
യോഗശാസ്ത്രപ്രകാരം (Sadhguru tradition):
7 major
21 minor
96 micro
3 secret chakrakal

A. ശരീരത്തിൽ 7 പ്രധാന energy hubs:
7 പ്രധാന ചക്രങ്ങൾ
1. മൂലാധാര – groundedness
2. സ്വാധിഷ്ഠാന – sexual & emotional flow
3. മണിപൂര – confidence, power
4. അനാഹത – love, forgiveness
5. വിശുദ്ധി – communication
6. ആജ്ഞാ – intuition
7. സഹസ്രാര – spiritual connection

B. Minor Chakras – 21
ഉദാഹരണത്തിന്:
കണങ്കാൽ ചക്ര
മുട്ട് ചക്ര
തൈറോയ്ഡ് മൈനർ
കാത്, കണ്ണ്, മൂക്ക് ചക്രങ്ങൾ
ലിവർ, സ്പ്ലീൻ, അഡ്രീനൽ ചക്രങ്ങൾ

C. Micro Chakras – 114

D. Lalana Chakra, Guru Chakra, Hrit Chakra

ഇവ പ്രധാന 7 ചക്രങ്ങളിൽ ഉൾപ്പെടാത്ത secret chakras ആണ്.

Chakra block ആകുമ്പോൾ അനുഭവിക്കുന്ന മാറ്റങ്ങൾ
മൂലാധാര → fear
സ്വാധിഷ്ഠാന → relationship issues
മണിപൂര → confidence crash
അനാഹത → emotional pain
വിശുദ്ധി → throat pressure
ആജ്ഞാ → headache, confusion
സഹസ്രാര → emptiness, disconnection

3. നാഡികൾ (Nadis) – Energy Channels
72,000 നാഡികൾ.
പ്രധാന 3:
ഇഡ (moon, cool, mind)
പിംഗള (sun, heat, energy)
സുഷുമ്ന (central channel – Kundalini path)

When Ida + Pingala balance = Sushumna opens.

മറ്റുള്ളവ:

ഗാന്ധാര, ഹസ്തിജിഹ്വ, പൂഷ, സർസ്വതി, വിശ്വോദ്യ

യഷസ്വിനി, അലമ്ബൂഷ, കുക് ഷി
ഇവ tantric books ൽ പറയുന്നവ മറ്റ് നാഡികളാണ്.

4. ഗ്രന്ഥികൾ (Granthis) – Energy Knots
മനുഷ്യരിൽ stuck emotions, past trauma, fear, ego, attachment എന്നിവ കൊണ്ട് energy "കെട്ടി" നിൽക്കുന്ന സ്ഥലങ്ങൾ.

3 പ്രധാന ഗ്രന്ഥികൾ
1. Brahma Granthi – root & pelvic (fear, insecurity)
2. Vishnu Granthi – heart region (pain, emotional block)
3. Rudra Granthi – brow region (ego, illusion, mental trauma)

ഗ്രന്ഥികൾ തുറന്നാൽ energy അതിവേഗം ഉയരും.

ചില താന്ത്രിക പാരമ്പര്യങ്ങളിൽ പറയുന്നു:
“അന്തരഗ്രന്ഥികൾ” —
വിവിധ ചക്രങ്ങൾക്ക് കീഴിൽ 24 വരെ ചെറിയ ഗ്രന്ഥികളും ഉണ്ട്.

5. Energy Cords (കോർഡുകൾ)
മറ്റുള്ളവരുമായി രൂപപ്പെട്ട അദൃശ്യ energy connections.

Types of cords
Love cords
Attachment cords
Sexual cords
Toxic cords
Psychic cords

3 പ്രധാന തരങ്ങൾ:
1. Emotional cords
– ബന്ധം, attachment, പേടി, past memories

2. Mental cords
– ആശയവിനിമയം, ചിന്താവിഷയം

3. Spiritual cords
– ശക്തമായ ആത്മബന്ധങ്ങൾ (rare)

താന്ത്രത്തിൽ ഇത് “സൂത്ര”, “ബന്ധ”, “രജ്ജു” എന്ന് വിളിക്കുന്നു.

Negative cord ഉണ്ടെങ്കിൽ
→ fatigue
→ sadness
→ unwanted thoughts
→ energy drain.

6. മർമ്മ (life force switch) പോയിന്റുകൾ (Ayurveda + Siddha)
ശരീരത്തിലെ 107 എനർജി പോയിന്റുകൾ (Nerve + Prana + Muscle junctions) സ്ഥിതി ചെയ്യുന്നത് -
തല
ഹൃദയം
നാഭി
സന്ധികൾ
കൈകാലുകൾ
nerves & vessels intersection points

ഇവ Block ആകുമ്പോൾ:
ഊർജ്ജ തകരാർ
pain
confidence drop
digestion issues

7. Vayu System (Pranic Winds)
ശരീരത്തിലെ അഞ്ച് പ്രാണങ്ങൾ + അഞ്ചു ഉപപ്രാണങ്ങൾ:

Main Pranas (Pancha Prana)
1. പ്രാണ
2. അപാന
3. സമാന
4. ഉദാന
5. വ്യാന

Upa-Pranas (5 Sub-Energies)
1. നാഗ
2. കൂർമ
3. കൃകര
4. ദേവദത്ത
5. ധനഞ്ചയ

ഇവയാണ് ശ്വാസം, ദഹനം, ബോധം, വാക്ക്, ചലനം, നിദ്ര എന്നിവ നിയന്ത്രിക്കുന്നത്.

8. Kosha Layers (Energy-Soul Sheaths)
1. Annamaya Kosha – ശാരീരിക ശരീരം
2. Pranamaya Kosha – Energy body
3. Manomaya Kosha – മനസ്
4. Vijnanamaya Kosha – ബുദ്ധി
5. Anandamaya Kosha – ആനന്ദ/സൂപ്പർ-കോൺഷ്യസ്

9. ബിന്ദു  – Energy Drop
Skull-ന്റെ പിൻഭാഗത്തെ subtle “soma drop”.
Khechari mudra + meditation ഉണ്ടെങ്കിൽ മാത്രം active ആകുന്ന point. Khechari mudra ചെയ്യാൻ നാക്ക് പാലേറ്റിൽ ടച്ച് ചെയ്ത് വക്കണം.

10. Kundalini Energy
മൂലാധാര ചക്രത്തിൽ coiled energy.
ഗ്രന്ഥികൾ soft ആയും നാഡികൾ clean ആയും aura strong ആയും വന്നാൽ safe ആയി ഉയരും.

ഇവയാണ് ആത്മാവിനും ശരീരത്തിനും ഇടയിൽ പാളികൾ.

ഇവയൊക്കെ ക്ലീൻ ആക്കാനും Energy activate ചെയ്യാനും ഏറ്റവും Scientific + Yogic മാർഗങ്ങൾ ഏതൊക്കെ എന്ന് നോക്കാം.

A) Aura Cleansing Methods
✔ Salt water bath
✔ Sambrani / Guggal / Sage
✔ Sun exposure (10 mins)
✔ Moon bathing (15 mins on Pournami)
✔ OM chanting vibration
✔ Avoid toxic people & psychic drains

B) Chakra Cleaning Methods
1. Beeja Mantras
LAM (basic chakra
VAM (sex chakra)
RAM (solar plexus chakra)
YAM (heart chakra)
HAM (throat chakra)
AUM (agna chakra)
Silence for Sahasrara (sahastar/brahm chakra)

2. Chakra Breathing
5 breaths in each chakra.
3. Emotional release for Anahata
Deep sighs “Haaa…”

C) Nadi Shodhana – The Master Cleanser
Daily 10 minutes → മുഴുവൻ energy system balance.
Benefits:
✓ Anxiety down
✓ Mind clarity
✓ Ida–Pingala balance
✓ Third eye activity
✓ Sushumna open

D) Granthi Opening Techniques
1. Moola Bandha → Brahma Granthi release
fear dissolves, sexual energy balance.
2. Uddiyana Bandha → Vishnu Granthi release
emotions & heart block dissolve.
3. Jalandhara Bandha → Rudra Granthi release
ego, overthinking reduce.
4. Mahabandha (only when comfortable)
all 3 locks together → fastest granthi cleansing.

E) Cord Cutting Ritual (Most Important)
Visualization + intention:
“ഈ energy എന്റെതല്ല. ഞാൻ release ചെയ്യുന്നു.” എന്ന് ഉച്ചറിക്കുക. Daily 3 min ചെയ്താൽ ഒത്തിരി റിലീഫ് കിട്ടും.

F) Diet for Energy Flow
Eat well 
Tender coconut water
Ghee 1 tsp
Milk + turmeric
Fresh fruits
Ash gourd juice
Honey (morning)

Avoid
porn
alcohol
smoking
late night sleeplessness
anger & jealousy
excess spices

G) Sound & Vibration Healing
Tibetan singing bowls
Rudraksha mala
OM 108 times
Mridangam or tanpura drone
Vibration pushes out negative fields.

H) Protection Techniques
Golden aura bubble visualization.
Hanuman Kavacham / Narasimha Kavacham.

Stops: jealousy, evil eye, psychic attack.

Energy Boosting Full Routine (Daily)
Morning (15 min)
Nadi Shodhana
Moola bandha
Uddiyana bandha
Jalandhara bandha
Chakra breathing

Evening (10 min)
Salt bath / smudging
Cord cutting
Emotional release

Night (5 min)
Sushumna spine visualization
Golden shield

21 ദിവസം ചെയ്താൽ നിങ്ങൾക്ക് അനുഭവപ്പെടുന്ന മാറ്റങ്ങൾ
✓ Head becomes lighter
✓ Emotional wounds heal
✓ Aura brightens
✓ Confidence rises
✓ Sexual energy stabilizes
✓ Overthinking dissolves
✓ Chakras feel open
✓ Spine warmth / tingling
✓ Deep sleep
✓ Calm mind
✓ Spiritual clarity

7. 7 OMs – 5 min
Result: Complete Cleansing + Full Energy Activation.

ഏതൊക്കെ energy system ആയാലും,
ഒറ്റ പ്രക്രിയ കൊണ്ട് എല്ലാം ക്ലീൻ ആകുകയും energy ഉയരുകയും ചെയ്യണമെങ്കിൽ:

Nadi Shodhana + Bhramari + OM

ഈ combo ആണ് ancient yogic “Trinity of Purification”.
Nadis clean
Aura cleanse
Cords cut
Granthis soften
Prana boost
Mind stabilize
Chakras recharge
Koshas align

This is the safest AND strongest method known in yoga.