पौराणिक कथा के अनुसार इस मंदिर में मौजूद कोट्टनकुलंगरा देवी की शिला को पहले चरवाहों ने देखा था. उन्होंने एक नारियल को इस शिला पर मारकर फेंका. नारियल मारते ही शिला से खून बहने लगा. इससे चरवाहे घबरा गए. उन्होंने इस बारे में गांव वालों को बताया तो ज्योतिष विशेषज्ञों को बुलाया गया. ज्योतिष विशेषज्ञों ने बताया कि इस शिला में स्वयं वनदेवी विराजमान हैं. फौरन यहां एक मंदिर बनवाओ और इनकी पूजा करने को ज्योतिषियों ने कहा। कहा जाता है कि जिन चरावाहों को शिला मिली थी, उन्होंने महिलाओं का रूप धारण करके मातारानी की पूजा अर्चना शुरू कर दी. इसके बाद से पुरुषों के महिला रूप में पूजा करने की परंपरा शुरू हो गई।
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